आदि पर्व  अध्याय १९९

वैशम्पाय़न उवाच

ततस्ते समनुज्ञाता द्रुपदेन महात्मना |  १०   क
पाण्डवाश्चैव कृष्णश्च विदुरश्च महामतिः ||  १०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति