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शान्ति पर्व
अध्याय २८६
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पराशर उवाच
अय़ोजय़ित्वा क्लेशेन जनं प्लाव्य च दुष्कृतम् |  २४   क
मृत्युनाप्राकृतेनेह कर्म कृत्वात्मशक्तितः ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति