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शान्ति पर्व
अध्याय १५७
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भीष्म उवाच
एतान्येव जितान्याहुः प्रशमाच्च त्रय़ोदश |  १८   क
एते हि धार्तराष्ट्राणां सर्वे दोषास्त्रय़ोदश |  १८   ख
त्वय़ा सर्वात्मना नित्यं विजिता जेष्यसे च तान् ||  १८   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति