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अनुशासन पर्व
अध्याय १११
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भीष्म उवाच
प्रार्थनाच्चैव तीर्थस्य स्नानाच्च पितृतर्पणात् |  १७   क
धुनन्ति पापं तीर्थेषु पूता यान्ति दिवं सुखम् ||  १७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति