उद्योग पर्व  अध्याय १११

नारद उवाच

सा तौ तदाव्रवीत्तुष्टा पतगेन्द्रद्विजर्षभौ |  १२   क
न भेतव्यं सुपर्णोऽसि सुपर्ण त्यज सम्भ्रमम् ||  १२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति