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शान्ति पर्व
अध्याय ५६
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वैशम्पाय़न उवाच
त्रिवर्गोऽत्र समासक्तो राजधर्मेषु कौरव |  ४   क
मोक्षधर्मश्च विस्पष्टः सकलोऽत्र समाहितः ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति