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अनुशासन पर्व
अध्याय १०३
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भृगुरु उवाच
भृगुं हि यदि सोऽद्राक्षीन्नहुषः पृथिवीपते |  २४   क
न स शक्तोऽभविष्यद्वै पातने तस्य तेजसा ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति