अनुशासन पर्व  अध्याय ३४

पृथिव्यु उवाच

यथा महार्णवे क्षिप्त आमलोष्टो विनश्यति |  २४   क
तथा दुश्चरितं कर्म पराभावाय़ कल्पते ||  २४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति