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अनुशासन पर्व
अध्याय ११२
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वृहस्पतिरु उवाच
श्वय़ोनौ तु स सम्भूतस्त्रीणि वर्षाणि जीवति |  ४८   क
तत्रापि निधनं प्राप्तः कृमिय़ोनौ प्रजाय़ते ||  ४८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति