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अनुशासन पर्व
अध्याय ११२
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वृहस्पतिरु उवाच
ततः प्रेत्य महाराज पुनर्जाय़ति सूकरः |  ६४   क
सूकरो जातमात्रस्तु रोगेण म्रिय़ते नृप ||  ६४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति