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उद्योग पर्व
अध्याय १३८
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वासुदेव उवाच
मित्राणि ते प्रहृष्यन्तु व्यथन्तु रिपवस्तथा |  २८   क
सौभ्रात्रं चैव तेऽद्यास्तु भ्रातृभिः सह पाण्डवैः ||  २८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति