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अनुशासन पर्व
अध्याय ११२
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वृहस्पतिरु उवाच
संसारचक्रमासाद्य कृमिय़ोनौ प्रजाय़ते |  ८३   क
कृमिर्भवति वर्षाणि दश पञ्च च भारत |  ८३   ख
ततो गर्भं समासाद्य तत्रैव म्रिय़ते शिशुः ||  ८३   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति