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उद्योग पर्व
अध्याय ८८
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वैशम्पाय़न उवाच
सुकुमारो युवा शूरो दर्शनीय़श्च पाण्डवः |  ३८   क
भ्रातॄणां कृष्ण सर्वेषां प्रिय़ः प्राणो वहिश्चरः ||  ३८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति