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अनुशासन पर्व
अध्याय ११२
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वृहस्पतिरु उवाच
चोरय़ित्वा पय़श्चापि वलाका सम्प्रजाय़ते |  ९६   क
यस्तु चोरय़ते तैलं तैलपाय़ी प्रजाय़ते |  ९६   ख
चोरय़ित्वा तु दुर्वुद्धिर्मधु दंशः प्रजाय़ते ||  ९६   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति