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शल्य पर्व
अध्याय ४
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सञ्जय़ उवाच
न ध्रुवं सुखमस्तीह कुतो राज्यं कुतो यशः |  २९   क
इह कीर्तिर्विधातव्या सा च युद्धेन नान्यथा ||  २९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति