आदि पर्व  अध्याय ९३

वैशम्पाय़न उवाच

एवं शशाप भगवान्वसूंस्तान्मुनिसत्तमः |  ३२   क
वशं कोपस्य सम्प्राप्त आपवो भरतर्षभ ||  ३२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति