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भीष्म पर्व
अध्याय ११२
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सञ्जय़ उवाच
सौभद्रो राजपुत्रं तु वृहद्वलमय़ोधय़त् |  ३०   क
आर्जुनिं कोसलेन्द्रस्तु विद्ध्वा पञ्चभिराय़सैः |  ३०   ख
पुनर्विव्याध विंशत्या शरैः संनतपर्वभिः ||  ३०   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति