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भीष्म पर्व
अध्याय ११२
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सञ्जय़ उवाच
अर्जुनस्तु रणे नागमाय़ान्तं रजतोपमम् |  ५७   क
विमलैराय़सैस्तीक्ष्णैरविध्यत महारणे ||  ५७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति