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भीष्म पर्व
अध्याय ११२
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सञ्जय़ उवाच
न तत्रासीन्महाराज सोमकानां महारथः |  ७५   क
यः सम्प्राप्य रणे भीष्मं जीविते स्म मनो दधे ||  ७५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति