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भीष्म पर्व
अध्याय ११२
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सञ्जय़ उवाच
यथाग्निरिन्धनं प्राप्य ज्वलेद्दीप्तार्चिरुल्वणः |  ९४   क
तथा जज्वाल पुत्रस्ते पाण्डवान्वै विनिर्दहन् ||  ९४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति