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भीष्म पर्व
अध्याय ११२
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सञ्जय़ उवाच
विजितस्तव पुत्रोऽपि भीष्मवाहुव्यपाश्रय़ः |  ९७   क
पुनः पुनः समाश्वस्य प्राय़ुध्यत रणोत्कटः |  ९७   ख
अर्जुनं च रणे राजन्योधय़न्स व्यराजत ||  ९७   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति