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द्रोण पर्व
अध्याय ११२
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सञ्जय़ उवाच
दृष्ट्वा तु भीमसेनस्य विक्रमं युधि भारत |  १४   क
अभ्यनन्दंस्त्वदीय़ाश्च सम्प्रहृष्टाश्च चारणाः ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति