menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
द्रोण पर्व
अध्याय ११२
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
ते समासाद्य कौन्तेय़मावृण्वञ्शरवृष्टिभिः |  २१   क
पर्वतं वारिधाराभिः प्रावृषीव वलाहकाः ||  २१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति