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द्रोण पर्व
अध्याय ११२
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सञ्जय़ उवाच
भीमसेनेन निहतान्विमना दुःखितोऽभवत् |  ३   क
निःश्वसन्दीर्घमुष्णं च पुनः पाण्डवमभ्ययात् ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति