आदि पर्व  अध्याय ११३

वैशम्पाय़न उवाच

एवमुक्तस्तय़ा राजा तां देवीं पुनरव्रवीत् |  १   क
धर्मविद्धर्मसंय़ुक्तमिदं वचनमुत्तमम् ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति