शान्ति पर्व  अध्याय ३३६

वैशम्पाय़न उवाच

एवं स भगवान्व्यासो गुरुर्मम विशां पते |  ५९   क
कथय़ामास धर्मज्ञो धर्मराज्ञे द्विजोत्तमः ||  ५९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति