आदि पर्व  अध्याय ११३

वैशम्पाय़न उवाच

स मेऽभिचारसंय़ुक्तमाचष्ट भगवान्वरम् |  ३४   क
मन्त्रग्रामं च मे प्रादादव्रवीच्चैव मामिदम् ||  ३४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति