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शान्ति पर्व
अध्याय ८८
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भीष्म उवाच
अस्यामापदि घोराय़ां सम्प्राप्ते दारुणे भय़े |  २७   क
परित्राणाय़ भवतां प्रार्थय़िष्ये धनानि वः ||  २७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति