आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ६५

वैशम्पाय़न उवाच

ततस्त्वरितमाय़ान्तीं ददर्श स्वां पितृष्वसाम् |  १२   क
क्रोशन्तीमभिधावेति वासुदेवं पुनः पुनः ||  १२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति