उद्योग पर्व  अध्याय ५०

धृतराष्ट्र उवाच

आय़सेन स दण्डेन रथान्नागान्हय़ान्नरान् |  २२   क
हनिष्यति रणे क्रुद्धो भीमः प्रहरतां वरः ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति