उद्योग पर्व  अध्याय ११३

नारद उवाच

सदा देवमनुष्याणामसुराणां च गालव |  १२   क
काङ्क्षिता रूपतो वाला सुता मे प्रतिगृह्यताम् ||  १२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति