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शान्ति पर्व
अध्याय १३६
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भीष्म उवाच
इति संस्तूय़मानो हि मार्जारेण स मूषकः |  १८२   क
मनसा भावगम्भीरं मार्जारं वाक्यमव्रवीत् ||  १८२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति