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शान्ति पर्व
अध्याय ३११
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भीष्म उवाच
देवतानामृषीणां च वाल्येऽपि स महातपाः |  २६   क
संमन्त्रणीय़ो मान्यश्च ज्ञानेन तपसा तथा ||  २६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति