आदि पर्व  अध्याय ११४

वैशम्पाय़न उवाच

सा वलिं त्वरिता देवी धर्माय़ोपजहार ह |  २   क
जजाप जप्यं विधिवद्दत्तं दुर्वाससा पुरा ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति