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आदि पर्व
अध्याय ४७
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सूत उवाच
निर्माय़ चापि विधिवद्यज्ञाय़तनमीप्सितम् |  १२   क
राजानं दीक्षय़ामासुः सर्पसत्राप्तय़े तदा ||  १२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति