वन पर्व  अध्याय ११४

लोमश उवाच

अवासीदच्च कौन्तेय़ दत्तमात्रा मही तदा |  १९   क
उवाच चापि कुपिता लोकेश्वरमिदं प्रभुम् ||  १९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति