वन पर्व  अध्याय ११४

लोमश उवाच

न मां मर्त्याय़ भगवन्कस्मैचिद्दातुमर्हसि |  २०   क
प्रदानं मोघमेतत्ते यास्याम्येषा रसातलम् ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति