वन पर्व  अध्याय ११४

लोमश उवाच

ततः प्रसन्ना पृथिवी तपसा तस्य पाण्डव |  २२   क
पुनरुन्मज्ज्य सलिलाद्वेदीरूपा स्थिता वभौ ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति