वन पर्व  अध्याय ११४

लोमश उवाच

सैषा प्रकाशते राजन्वेदी संस्थानलक्षणा |  २३   क
आरुह्यात्र महाराज वीर्यवान्वै भविष्यसि ||  २३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति