वन पर्व  अध्याय ११४

लोमश उवाच

एते कलिङ्गाः कौन्तेय़ यत्र वैतरणी नदी |  ४   क
यत्राय़जत धर्मोऽपि देवाञ्शरणमेत्य वै ||  ४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति