वन पर्व  अध्याय ११४

लोमश उवाच

हृते पशौ तदा देवास्तमूचुर्भरतर्षभ |  ८   क
मा परस्वमभिद्रोग्धा मा धर्मान्सकलान्नशीः ||  ८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति