उद्योग पर्व  अध्याय ११४

नारद उवाच

इय़ं कन्या नरश्रेष्ठ हर्यश्व प्रतिगृह्यताम् |  १५   क
चतुर्भागेन शुल्कस्य जनय़स्वैकमात्मजम् ||  १५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति