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भीष्म पर्व
अध्याय ११४
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सञ्जय़ उवाच
इति देवगणानां च श्रुत्वा वाक्यं महामनाः |  ४०   क
ततः शान्तनवो भीष्मो वीभत्सुं नाभ्यवर्तत |  ४०   ख
भिद्यमानः शितैर्वाणैः सर्वावरणभेदिभिः ||  ४०   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति