menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
भीष्म पर्व
अध्याय ११४
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
न चैष शक्यः समरे जेतुं वज्रभृता अपि |  ५२   क
न चापि सहिता वीरा देवदानवराक्षसाः |  ५२   ख
मां चैव शक्ता निर्जेतुं किमु मर्त्याः सुदुर्वलाः ||  ५२   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति