उद्योग पर्व  अध्याय १७७

राम उवाच

काशिकन्ये पुनर्व्रूहि भीष्मस्ते चरणावुभौ |  ६   क
शिरसा वन्दनार्होऽपि ग्रहीष्यति गिरा मम ||  ६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति