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भीष्म पर्व
अध्याय ११४
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सञ्जय़ उवाच
कथं महात्मा गाङ्गेय़ः सर्वशस्त्रभृतां वरः |  ८८   क
कालं कर्ता नरव्याघ्रः सम्प्राप्ते दक्षिणाय़ने ||  ८८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति