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द्रोण पर्व
अध्याय ११४
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सञ्जय़ उवाच
उत्स्मय़न्निव भीमस्य क्रुद्धः कालानलप्रभः |  ४६   क
ध्वजं चिच्छेद राधेय़ः पताकाश्च न्यपातय़त् ||  ४६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति