menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
द्रोण पर्व
अध्याय ११४
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
स छिन्नधन्वा विरथः स्वधर्ममनुपालय़न् |  ५८   क
स्वरथं पृष्ठतः कृत्वा युद्धाय़ैव व्यवस्थितः ||  ५८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति