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शान्ति पर्व
अध्याय ८८
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भीष्म उवाच
फलं कर्म च सम्प्रेक्ष्य ततः सर्वं प्रकल्पय़ेत् |  १४   क
फलं कर्म च निर्हेतु न कश्चित्सम्प्रवर्तय़ेत् ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति