menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय ११५
chevron_left
chevron_right
अकृतव्रण उवाच
ततः स्नुषां स भगवान्प्रहृष्टो भृगुरव्रवीत् |  २१   क
वरं वृणीष्व सुभगे दाता ह्यस्मि तवेप्सितम् ||  २१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति